bhutiya kahani: शानदार तीन कहानी जो आपको पढ़नी चाहिए

By | February 16, 2021

 

bhutiya kahani: शानदार तीन कहानी जो आपको पढ़नी चाहिए

 

स्वागत है आपका आप यहाँ आये इसका मतलब है की आप  bhutiya kahani को पढ ना अच्छा लगता है।

हमने आपके लिए तीन(3) बहेतरीन bhoot wali kahani लिखी है आप इसको जरूर पढ़े।

  • चुड़ैल की बर्थडे पार्टी
  • भूतिया ढाबा
  • सात मटके

आप को ये तीन बहेतरीन bhutiya kahani को पढ़ने के बाद अपना सुझाव जरूर दे।

 

bhutiya kahani (1): चुड़ैल की बर्थडे पार्टी

bhutiya kahani

 

यह बात तक़रीबन 10 साल पुरानी है। मेरा नाम राधिका है और मेने 11 वी class मे नये स्कूल मे एडमिशन लिया था।

नये स्कूल और नये class मे मेरा कोई दोस्त नहीं था सब नये लोग ही थे। मे class मे चुप-चाप सबके पीछे बैठती थी।

मे class मे किसी से ज्यादा बाते भी नहीं करती थी क्योंकि यहाँ मेरा कोई भी दोस्त नहीं था मे अकेली थी।

जब स्कूल के ब्रेक का समय होता था तब सभी बच्चे बाहर चले जाते थे और मे अकेली class मे बैठी रहती थी।

यहाँ स्कूल मे कोई नहीं था जो मुझसे बात करें।

ऐसे ही एक दिन मे अकेली class मे बैठी थी तब पिछेसे किसीने मेरे पीठ पे हाथ रखा।

मेने पीछे मुड़के देखा तो एक लड़की मेरे पास बैठी थी और वो लड़की बोली मेरा नाम शालिनी है।

शालिनी बहोत कम स्कूल मे आती थी यहाँ स्कूल मे शालिनी का भी कोई दोस्त नहीं था। 

शालिनी ने मुझे कहा की क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी।तब से मे और शालिनी एक दूसरे की दोस्त बन गई।

एक दिन शालिनी ने मुझे कहा की आज मेरा बर्थडे है क्या तुम आना चाहोगी।

मेने कहा है क्यों नहीं? शालिनी ने अपने घर का पता मेरे बुक मे लिख दिया।

मे स्कूल से घर आयी और मे नहा-धोके तैयार हो गई और शालिनी के घर जाने लगी।

उसका घर रेलवे की पटरी के नजदीक था।

मे जब उसके घर जा रही थी तब मौशम अचानक बदल रहा था।

और बहोत धूल भी फेल रही थी जिसे मुझे देख ने मे मुश्किल हो रही थी।

जब मे रेलवे के नजदीक पहोची तब वहां रेलवे की पटरी के बीचमे शालिनी खड़ी थी और मुझे हाथ हिलाके बुला रही थी।

मुझे धूल के कारण धुंधला दिखाई दे रहा था उसी वक्त शालिनी के ऊपर से ट्रेन चली गई।

मे घबरा गई और वहां जाके देख तो कुछ नहीं था। फिर उसी वक्त वहां दूसरी ट्रैन आयी।

मे वहासे निकली और शालिनी के बताये पते पर पहुंची तब मेने देखा की यहाँ इस घर मे कोई नहीं रहता।

फिर मेने हिम्मत करके घर के अंदर गई तो वहां बर्थडे की सजावट की गई थी बहुत गुब्बारे और केक भी रखा हुआ था।

अभी वहां पे शालिनी आयी और हमने कुछ बाते की।

फिर शालिनी बोली मे अपनी मा को लेकर बस अभी आयी इसका ऑफिस से आनेका समय हो गया है।

मा के आने के बाद हम फिर हम साथ मे बर्थडे मनाये गे तुम यही रुको।

मेने कहा ठीक है फिर शालिनी अपनी मा को लेने गई लेकिन बहुत समय चला गया शालिनी वापस लोट के नहीं आयी।

शालिनी वापस नहीं आयी इसीलिए मे उसको खोजने के लिए घर से बाहर निकली।

तब वहां पड़ोस मे खड़ी औरत मुझे अजीब तरह से देखने लगी।

पड़ोस मे खड़ी औरत ने मुझे कहा कौन हो तुम और यहाँ पे क्या कार रही हो?

मेने उस औरत को कहा की मेरी दोस्त शालिनी का आज बर्थडे है और मे उसकी बर्थडे पार्टी मे आयी हु।

तब मुझे वो औरत मे जवाब दिया उसको सुन के मे बहोत डर गई।

वो औरत ने कहा की आजसे कुछ 5 साल पहले यहाँ पूजा और उनकी बेटी शालिनी रहते थे।

वो मा और उनकी बेटी एक दूसरे के लिए जीते थे।उनकी मा ऑफिस जाती और साम के समय घर पे वापस आती थी और शालिनी स्कूल मे पढ ने जाती।

एक दिन शालिनी का बर्थडे आया और शालिनी ने बर्थडे की पूरी तैयारी की हुयी थी। 

वो अपनी मा के आने की राह देख रही थी।

उसकी मा को ऑफिस से आने मे देर ही गई तो शालिनी अपनी मा को लेने के लिए बाहर गई।

उसकी मा सामने से आ रही थी और शालिनी ट्रैन की पटरी पे खड़ी थी तब।

उसी समय एक ट्रैन आयी और शालिनी के ऊपर से चली गई।

शालिनी की उसी समय मौत हो गई उसकी मा वो देख नहीं सकी उसी वक्त एक दूसरी ट्रैन आयी और वो भी उसके सामने आके मर गई।

उसी दिन उन दोनों मा और बेटी की मौत हो गई।

जैसे तुम आज आयी वैसे ही हर साल शालिनी के बर्थडे पर नये नये लोग आते है।

 वो सभी शालिनी के बर्थडे को मानते है लेकिन किसी को नहीं पता की शालिनी अब चुड़ैल के रूप मे आकर 

मे वो औरत की बात सुन कार बहुत डर गई और मेरे घर पे चली गई मे सबको ये बात बोलती लेकिन कोई मेरी बात का विश्वास नहीं करता की मे एक बहुत की बर्थडे पार्टी मे गई थी।

 

bhutiya kahani (2): भूतिया ढाबा

 

एक गोरखपुर नाम का गांव था वहां पे ‘राजा का ढाबा’ नाम का एक ढाबा था।

उस ढाबे को एक सेठ और उनके नौकर रामु और राजेश चलाते थे।

उस ढाबे का खाना बहुत मशहूर था जो भी एक बारे यहाँ खाना खाने आता है वो उसका स्वाद कभी नहीं भूल पता।

‘राजा का ढाबा’ इतना मशहूर था की बाहर से लोग यहाँ केवल खाना खाने के लिए आते थे।

धीरे धीरे ढाबा और मशहूर होता गया और उनके साथ उनके सेठ का घमंड भी बढ़ता गया।

शेठ को ढाबे मे बचा हुआ खाना फेकना मंजूर था लेकिन किसी जानवर या भिखारी को देना मंजूर नहीं था।

एक दिन उस ढाबे मे एक बिचारा भिखारी आता है वो भिखारी कई दिनों से भुखा होता है।

भिखारी ढाबे के सेठ को जाके बोलता है सेठ कुछ खाना होतो मुझे देदो मे बहुत दिनों से कुछ नहीं खाया हु।

सेठ ने बोला की मे तुम जैसे भिखारी को खाना नहीं देता यहाँ से तुम चले जाओ।

सेठ ने रामु को बोला की रामु इसको यहासे निकालो हमारे घराक के आने का समय हो गया है।

रामूने उस भिखारी को वहासे निकला और ढाबे से सामने थोड़ी देर बाद भिखारी बेहोश हो गया।

रामूने सेठ को बोला की सेठ ये तो बेहोश हो गया अब हम इसका क्या करें।

सेठ बोला तुम इसको यहा से उठाके दूर फेक दो।

रामु बेहोश भिखारी के पास गया तब उसने देखा की भिखारी की तो भूख से मौत हो गई है।

रामूने ये बात सेठ से कही तो सेठ बोला की इसको पीछे वाले कुवे मे फेक दो।

रामु उसको उठाके पीछे वाले कुवे मे फेक देता है और सेठ से कहता है की मेने उसको कुवे मे फेक दिया और किसी ने देखा भी नहीं। 

सेठ बोला ठीक है।

जब साम हुयी तब सेठ ने आपने नौकरो को घर जाने का बोला और सेठ भी ढाबा बंद करके अपने घर चला गया।

सेठ जब घर जा रहा था तब उनको लगा की कोई मेरा पीछा कार रहा है। सेठ ने पीछे देखा तो कोई नहीं था।

फिर सेठ ने आगे चलना सारु किया। सेठ को पीछे से किसी ने जोर से हाथ मारा।

सेठ फिर से पीछे देखा तो पीछे कोई भी नहीं था सेठ बहुत डर गया और जल्दी-जल्दी अपने घर पंहुचा।

घर जाके अपनी पत्नी को खाना लाने के लिए बोला।

उनकी पत्नी खाना लेके आ रही थी तब उनको किसीने पीछे से जोर से धक्का दिया और सारा खाना गिर गया।

सेठ बोला कोई बात नहीं आजका दिन ही ख़राब है।

दूसरे दिन सेठ अपने ढाबे पर गई। ढाबे मे कोई घराक खाना खाने आया और उसने रामु को खाने का ऑर्डर दिया

रामु खाना लेकर आया और घराक को खाना दिया।

घराक ने खाना खाके बोला ये केसा खाना बना है ये बहुत ही तीखा है। उसने सेठ को सिकायट की….

सेठ ने रामु को कल से अच्छा खाना बना ने को बोला।

रामूने दूसरे दिन अच्छा खाना बनाया और सेठ को खिलाया और सेठ बोला ठीक है।

वहां फिर एक घराक आया और रामु को ऑर्डर दिया रामु ने खाना लाके उसके टेबल पर रखा।

खाने मे बहुत अच्छी खुसबू आ रही थी वो खाने को अच्छे से सूंघ रहा था।

तभी अचानक उनकी थाली से रोटी गायब हो गई तो उसने रामुको बोला की भाई रोटी गायब हो गई।

ऐसी ही परेशानी हररोज सभी घराक को होने लगी और ये सब वो भूखा भिखारी की आत्मा कार रही थी।

एक दिन दूर गांव से कुछ लोग खाना खाने के लिए ढाबे मे आये उन्होंने उस ढाबे के बारेमे बहुत सुना था।

जब वो दोनों खाना खाने बैठे तब ही वहां उनकी दाल की सब्जी चिकन की सब्जी मे बदल गई।

वो लोग समझ गए यहाँ कोई बहुत है और वो वहासे भाग गई।उसके बाद उस ढाबे का नाम भूतिया ढाबा हो गया।

रामु ने सेठ को बोला की मुझे ये लगता है की ये सब वो भूखे भिखारी की आत्मा कार रही है।

सेठ बोला की मुझे भी ऐसा ही लग रहा है इसका कोई इलाज बताओ।

रामु बोला की मे एक बाबा को जानता हु जो बहुत ही ज्ञानी है वो जरूर हमारी समस्या का समाधान निकाले गे।

उसके अगले दीन रामु और उनका सेठ रामूने बताये बाबा के पास गये।

बाबा ने जो भी उन दोनों से पूछा वो सब कुछ उसने सही सही बाबा को बता दिया।

फिर बाबा बोला ये सब वो भिखारी की आत्मा कार रही है क्यों की तुमने खाना फेक दिया लेकिन उस भिखारी को नहीं दिया।

बाबा ने अपने मंत्र बोल कार भिखारी की आत्मा को बुलाया।

भिखारी की आत्मा वहां प्रगट हो गई। सेठ और रामु दोनों ने उस भिखारी की आत्मा से माफ़ी मांगी।

सेठ ने बाबा को बोला आजके बाद मे कभी भी बैजे हुए खाने को नहीं फेकूंगा। उस बच्चे हुआ खाने को सब भिकारी को खिलाउ गा।

फिर बाबा ने ये सुन के भिखारी के आत्मा ऊपर गंगा जल डाला और उन आत्मा को मुक्ति दे दी।

उसके बाद उस ढाबे मे जो भी भिखारी आता उनको सेठ खुश हो के खाना देता। फिर से उस ढाबे का नाम ‘भूतिया ढाबा’ से ‘राजा का ढाबा’ हो गया।

इस bhutiya kahani से सिख:

हमें जो मिला है उसका घमंड ना करके हमें हमारा खाना किसी भूखे को देना चाहिए जिसे वो भी अपनी भूख मिटा सके।

हमें यह सोचना है की भगवान ने हमें ये मौका दिया है ऐसा सोच के सबको खाना देना चाहिए।

 

दोस्तों आपको ये bhutiya kahani कैसी लगी please comment करके बताए। आप किस topic पे kahani चाहते है हमें comment करके जरूर बता ए।

 

 Bhutiya kahani (3): सात मटके

 

bhutiya kahani

एक गांव मे एक शीतल नाम की बूढी औरत रहती थी। उसके पास बहुत सारा पैसा और सोना था।

शीतल बहुत ही कंजूस थी इसी लिए वो अपने धन(पैसा) मे से किसी कोभी कुछ नहीं देती थी और कोई दान भी नहीं करती थी।

उसने अपने सारे पैसे को घड़े मे रख कार घर के रूम के अंदर गड्ढा करके उसमे रख दिया था।

शीतल भी वो घड़े के ऊपर ही अपना खटिया रख के सोया करती थी।

गांव मे शीतल को कोई भी पसंद नहीं करते थे सब उनको कंजूश ही कहते थे।

एक दी उस गांव मे एक साधु आया और साधु शीतल के घर के आगे वाले पेड़ के निचे तपस्या करने लगा वो शीतल को नहीं जनता था।

शीतल घर से बाहर निकली और देखा तो उसको कोई चोर लगा उसने एक बड़ा डंडा लिया और साधु को मार के भगा दिया।

साधु वहां से चला गया और गांव मे सबको जाके शीतल के बारेमे पूछा।

गांव वालों ने बताया की यह औरत बहुत कंजूस है और ये अपने पैसे को किसीको भी नहीं देती।उनको सब लोग चोर ही लगते है।

यह सुन कर साधु को उस औरत पर दया आयी और उनको सुधार ने का सोचा।

एक दिन बूढी औरत शीतल के घर के सामने मध्य रात्रि को एक चुड़ैल नाच रही थी।

शीतल ने नाचने का आवाज सुन कर घर से बाहर देखा तो एक चुड़ैल अपने सर पर सात मटके लेकर नाच रही थी।

उसमे से सबसे ऊपर वाले मटके मे आग लगी हुयी थी। वो चुड़ैल थोड़ी देर नाच ने के बाद ऊपर वाला मटका गिरा देती थी और चली जाती थी।

दूसरे दिन भी वही समय पर चुड़ैल आयी और आज उसके सर पर छे मटके थे उसमे ऊपर वाले मटके मे आग लगी हुयी थी।

आज भी सबसे ऊपर वाला मटका गिरा दिया और वो चली गई।

शीतल बहुत डर गई और वो गांव वालों से मदद मागने गई लेकिन कोई मदद क्यों करें?

 वो चलते चलते उस साधु के पास पहुंची और वहां जासे माफ़ी मांगी की मेने आपको चोर समझ लिया मुझे माफ कार दो।

साधु को अपनी सारी समस्या बताई और साधु ने कहा की आप के मौत का समय नजदीक आ गया है जैसे ही सारे मटके फुट जाये गे आपको वो चुड़ैल उठाके ले जाये गी।

वो बूढी औरत घबरा गई और बोला साधु इसका कोई उपाय बताए।

साधु ने बोला की आप अपने पैसे का दान धर्म करिये तो आपकी यह समस्या ख़तम हो जाये गी।

बूढी औरत दान करने के लिए अपने आस पास के लोगो के पास गई लेकिन किसी ने उनका दान नहीं लिया।

वो शीतल फीर से साधु के पास गई और बोली मुनिवर मेरा दान कोई नहीं ले रहा।

साधु ने बोला ये धन आपने लालच करके जमा किया है इसी लिए इनको कोई भी लेना नहीं चाहिए।

ये सुन के शीतल बोली ये धन को आप अच्छे कम के लिए उपयोग करिये। साधु ने कहा ठीक है….

फिर साधु उस धन को लेकर बड़ा मंदिर, अनाथ आश्रम और कई अच्छे कामों मे लगाया।

ये सब करके वो औरत का बड़ा नाम हुआ और उनकी चुड़ैल वाली समस्या भी चली गई।

इस bhutiya kahani से सिख:

 अपने धन को हमेशा जरुरत मंद को बाटना चाहिए इससे परम आनंद की प्राप्ति होती है और हमारा बड़ा नाम होता है।

दोस्तों आपको हमारी bhutiya kahani अच्छी लगती है तो please हमें comment करें…

आप ये सब kahani वीडियो मे देखना चाहते है तो youtube पर देख सकते है

 

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