Sensex क्या होता है ? Sensex ऊपर-नीचे होने का क्या मतलब है ?

By | May 6, 2021

Sensex क्या होता है ? Sensex ऊपर-नीचे होने का क्या मतलब है ? – यदि आप Share Market में थोड़ी बहुत रूचि रखते हैं तो Sensex के बारे में सुना ही होगा। यदि आप वित्तीय समाचारों को देखते होंगे तो उसमें आए दिन यह खबर आता है कि आज Sensex ऊपर उठा या नीचे गिरा। Sensex नीचे गिरने पर शेयर मार्केट में नुकसान होता है और Sensex ऊपर उठने पर शेयर मार्केट में फायदा होता है। यह सुनने के बाद आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि Sensex क्या है और Sensex ऊपर नीचे होने का क्या मतलब है? इस आर्टिकल में हम आपको इन्हीं सभी चीजों के बारे में जानकारी देंगे। 25 रूपए से भी कम में खरीदें ये 5 शेयर ,  जो आपको बना सकते हैं लखपति

Sensex क्या होता है ?

Sensex का पूरा नाम सेंसिटिव शेयर इंडेक्स है। यह शेयर मार्केट का ही एक भाग है, जो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के अंतर्गत आता है। Sensex बांबे स्टाक एक्सचेंज का एक सूचकांक है, जो इसमें रजिस्टर्ड कम्पनियों के शेयर की कीमतों को दर्शाता है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में कई सारी कंपनियां रजिस्टर्ड है। इन कंपनियों के शेयर की कीमतें हमेशा ऊपर नीचे होती रहती हैं। इन्हीं कीमतों को Sensex के जरिए प्रदर्शित किया जाता है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) क्या है ?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बांबे स्टाक एक्सचेंज (BSE) भारत का पहला स्टॉक एक्सचेंज है, जिसे 1875 में शुरू किया गया था इसके अंतर्गत लगभग 6000 से अधिक कंपनियां लिस्टेड हैं। लेकिन आप सब सोचते होंगे कि सेंसेक्स इन 6000 कंपनियों के आधार पर तय होता है जबकि ऐसा नहीं है। दरअसल Bombay Stock Exchange में 30 प्रमुख कंपनियां इन सभी 6000 कंपनियों का नेतृत्व करती हैं, जिन्हें ब्लू चिप कंपनियाँ कहा जाता है। बीएसई के शेयर मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव इन्हीं 30 कंपनियों के market capitalisation के आधार पर तय होती है।

सेंसेक्स की शुरूआत और वैल्यू

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सूचकांक के रूप में Sensex को 3 जनवरी 1986 में शुरू किया गया था। उस समय इसकी वैल्यू 100 तय की गई थी। इसकी वैल्यू 100 रखने के पीछे यह वजह है कि इसे समझने में लोगों को आसानी हो सके। आज के समय में सेंसेक्स की वैल्यू 100 से बढ़कर 30,000 से अधिक हो चुकी है। अब Sensex की वैल्यू देखकर ही लोग बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव को समझते हैं।

सेंसेक्स की गणना कैसे होती है ?

जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि Bombay Stock Exchange में रजिस्टर्ड प्रमुख 30 कंपनियों के market capitalisation के आधार पर ही सेंसेक्स तय किया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेंसेक्स की गणना के लिए free float market capitalisation method का प्रयोग किया जाता है। ऐसे शेयर जो खरीदने एवं बेचने दोनों के लिए बाजार में उपलब्ध हो उसे Free Float कहा जाता है। हालांकि किसी कंपनी के सभी शेयर बाजार में नहीं लाए जाते कुछ शेयर कंपनियां खुद अपने पास रखती हैं या फिर सरकार के पास रखती हैं। ताकि कोई व्यक्ति उनके पूरे शेयर को खरीद कर उस पर मालिकाना हक न जता सके।

Market capitalisation क्या होता है ?

Market capitalisation स्टॉक एक्सचेंज में मौजूद कंपनी के शेयर की कीमतों के बराबर होता है। किसी भी कंपनी का market cap शेयर मार्केट में मौजूद उसके शेयर और उनकी कीमतों के आधार पर तय होता है। आपने अक्सर अखबारों में या टीवी चैनलों पर सुना होगा कि किसी कंपनी का शेयर गिरने से उसकी market value कम हो गई है। ऐसा इसी कारण होता है।

BSE में लिस्टेड 30 प्रमुख कंपनियां

जैसा कि हमने आपको बताया कि Bombay Stock Exchange में लिस्टेड 30 प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर Sensex की वैल्यू तय होती है। सेंसेक्स की वैल्यू हर मिनट बदलती रहती है ऐसे में सभी 6000 कंपनियों के शेयर की वैल्यू निकालना काफी मुश्किल है। इसीलिए Bombay Stock Exchange ने 30 प्रमुख बड़ी कंपनियों को इसके लिए चुना है।

एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, बजाज ऑटो, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एचसीएल टेक्नोलॉजी लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक, हीरो मोटोकॉर्प, हिंदुस्तान युनिलीवर, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कारपोरेशन, आईसीआईसीआई बैंक, इंडसइंड बैंक, इंफोसिस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, लार्सन एंड टर्बो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुज़ुकी, नेस्ले इंडिया लिमिटेड, एनटीपीसी, आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन, पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया, रिलायंस इंडस्ट्रीज, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सन फार्मास्यूटिकल, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज, टाटा स्टील, टेक महिंद्रा लिमिटेड, टाइटन कंपनी लिमिटेड, अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड।

सेंसेक्स ऊपर-नीचे होने का क्या मतलब है ?

जब कोई भी कंपनी अपने शेयर को मार्केट में लाती है तो वह चाहती है कि उसके शेयर को अधिक से अधिक खरीदा जाए ताकि उसे लाभ हो और उसके उद्योग में वृद्धि हो। यदि अधिक से अधिक लोग उसके शेयर को खरीदते हैं तो कंपनी को लाभ होता है और उसके शेयर की कीमतें भी बढ़ जाती है। इस तरह से सेंसेक्स भी ऊपर हो जाता है। यदि किसी कंपनी के शेयर अधिक से अधिक बिकने लगे तो उस कंपनी को नुकसान हो जाता है और उसके शेयर की वैल्यू गिर जाती है। इस तरह से सेंसेक्स भी नीचे गिर जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *